March 1, 2026 7:07 pm

धान खरीदी में मनमानी का आरोप: बिरकोनी समिति प्रभारी समय पर नहीं आने पर सवालों की बौछार, किसान हलकान, प्रशासन की साख दांव पर!

धान खरीदी में मनमानी का आरोप: बिरकोनी समिति प्रभारी समय पर नहीं आने पर सवालों की बौछार, किसान हलकान, प्रशासन की साख दांव पर!

Mahasamund/छत्तीसगढ़ सरकार की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील योजनाओं में शामिल धान खरीदी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महासमुंद जिले की बिरकोनी सेवा सहकारी समिति (पंजीयन क्रमांक 1696) इन दिनों चर्चाओं के केंद्र में है, जहां समिति प्रभारी मोहन सिंह जांगड़े पर नियमों की खुलेआम अनदेखी करने और किसानों के साथ लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह सिर्फ अव्यवस्था नहीं बल्कि शासन के निर्देशों की सीधी अवहेलना है।

धान खरीदी का मौसम आते ही शासन-प्रशासन किसानों को आश्वासन देता है कि उनकी उपज समय पर, पारदर्शी और नियमों के अनुसार खरीदी जाएगी। लेकिन बिरकोनी समिति में हालात इसके ठीक उलट बताए जा रहे हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि समिति प्रभारी समय पर खरीदी केंद्र नहीं पहुंचते, जिससे दूर-दराज से आए किसानों को घंटों नहीं बल्कि पूरा दिन इंतजार करना पड़ता है। कई किसान तो मजबूरी में खाली लौटने को विवश हो जाते हैं।

बिरकोनी समिति ग्रामीण किसानों के अनुसार, धान खरीदी के बाद धान का उसी दिन स्टेक (सुरक्षित ढंग से ढेर लगाना) किया जाना अनिवार्य है, ताकि अनाज खराब दीमक का खतरा ज्यादा होता है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। लेकिन आरोप है कि बिरकोनी उपार्जन केंद्र में खरीदी के बाद धान को उसी दिन स्टेक में नहीं लगाया जाता, बल्कि अगले दिन स्टेक किया जाता है, जो कि नियमों के स्पष्ट खिलाफ है। इससे न सिर्फ धान की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं, बल्कि गड़बड़ी और हेरफेर की आशंका भी बढ़ जाती है। और तो और यहां तक जो धान चबूतरों से नीचे रखा गया है उसमें भूसा 2 लेयर में धान के बोरो के नीचे रखना है नियम से, लेकिन समिति प्रभारी द्वारा 1 लेयर में ही धान को रख दिया गया है।

किसानों का दर्द सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समिति की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। “हम सुबह-सुबह धान लेकर पहुंचते हैं, लेकिन प्रभारी अधिकारी नहीं रहते है वह 11 बजे आते है।” एक किसान ने आक्रोश जताते हुए कहा। किसानों का आरोप है कि इस लापरवाही से उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है।

बिरकोनी समितिहैरानी की बात यह है कि जिला कलेक्टर द्वारा धान खरीदी केंद्रों की सतत निगरानी स्वयं की जा रही है और निरीक्षण भी के बावजूद भी मोहन लाल जांगड़े को कोई डर नहीं है जिला प्रशासन के निर्देश स्पष्ट रूप से जारी किए जा चुके हैं।और प्रशासन की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि खरीदी प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके बावजूद बिरकोनी समिति की कार्यशैली में कोई सुधार न होना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा लग रहा है जैसे समिति प्रभारी को किसी भी तरह का डर या जवाबदेही नहीं है, और समिति को पूरी तरह मनमाने ढंग से चलाया जा रहा है।

धान खरीदी अधिनियम और शासन के दिशा-निर्देशों का पालन करना न सिर्फ कानूनी बाध्यता है,बल्कि किसानों के हितों से सीधे जुड़ा हुआ विषय भी है।अगर इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल एक समिति तक सीमित मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा देता है। किसान पूछ रहे हैं कि जब नियम कायदे सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएं, तो फिर निरीक्षण और आदेशों का क्या मतलब?

स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो इसका असर आने वाले खरीदी सीजन पर भी पड़ सकता है। किसान पहले ही मौसम, लागत और बाजार की मार झेल रहे हैं, ऐसे में धान खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था उनकी परेशानियों को और बढ़ा देती है। “सरकार हमारी भलाई की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है,”यह सवाल अब हर किसान की जुबान पर है।

अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या बिरकोनी समिति में कथित लापरवाही और नियमों की अनदेखी की जांच होगी?क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? किसानों को उम्मीद है कि उनकी आवाज अनसुनी नहीं होगी और शासन की महत्वपूर्ण योजना को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। क्या समिति प्रभारी समय का पालन करेगा या जिला प्रशासन कोई कार्यवाही करेगा?

फिलहाल, बिरकोनी समिति का यह मामला महासमुंद जिले में धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है।अब देखना यह है कि प्रशासन इस आग को कैसे बुझाता है—कार्रवाई से या फिर सिर्फ आश्वासनों से।

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