धरना स्थल से उठी ‘सफ़ेद कोट की ज्वाला’, 10वें दिन भी अडिग NHM कर्मचारी – राजधानी में स्वास्थ्य सेवाएँ ठप, मरीज बेहाल!”
Raipur/राजधानी रायपुर इन दिनों आंदोलन की आग में सुलग रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के हज़ारों कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार 10वें दिन भी धरना स्थल पर डटे हुए हैं। अस्पतालों में ताले लटक गए हैं, वार्डों में सन्नाटा पसरा है और दरवाजों पर “असुविधा के लिए खेद है” की सूचनाएँ टंगी हैं। यही नहीं, जिस अस्पताल में कभी दिन-रात मरीजों की आवाजाही रहती थी, आज वहां “चमाचम तालेबंदी” का नज़ारा है।
धरना स्थल पर अनोखे प्रदर्शन, PPE किट पहनकर जताया आक्रोश!
आज के आंदोलन में कर्मचारियों ने सरकार को कोविड-19 काल की भयावह तस्वीर याद दिलाने के लिए PPE किट पहनकर सड़क पर मार्च किया। कुछ कर्मचारियों ने सब्जी बाज़ार में जाकर “भीख मांगने का नाटक” कर यह जताया कि उनकी मेहनत और वर्षों की सेवा का सरकार ने कोई मूल्य नहीं समझा। यह दृश्य देखकर आम लोग भी आंदोलित हो उठे और कर्मचारियों के समर्थन में आवाज़ बुलंद करने लगे।
सरकार पर धोखे का आरोप, मंत्री के बयान से गुस्सा!
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार उनकी 10 में से 5 मांगें पूरी होने का दावा कर रही है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। उनका कहना है कि अधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री को गुमराह कर दिया और मंत्री ने बिना आदेश के झूठा बयान दे दिया।
आक्रोशित कर्मचारियों ने कहा –
“सरकार की घोषणाएँ अब सिर्फ़ हवा में उड़ते वादे हैं, मोदी की गारंटी महज़ कोरी बातें साबित हो रही हैं।”
सहानुभूति जनता की, जिम्मेदारी सरकार की!
धरना स्थल पर रोज़ाना जुटने वाली भीड़ इस बात का गवाह है कि जनता भी कर्मचारियों के साथ है। शासकीय अस्पतालों में वर्षों से सेवाएँ देने वाले इन कर्मियों की दयनीय स्थिति देखकर आम नागरिक उनके समर्थन में खड़े हो रहे हैं। रायपुर से लेकर दूर-दराज़ के ग्रामीण इलाकों तक मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। मजबूरी में जीवन दीप समिति के कर्मचारियों को अस्पतालों में तैनात किया गया है, लेकिन बिना उचित प्रशिक्षण के वे सिर्फ़ औपचारिक सहयोग कर पा रहे हैं।
“आंदोलन अब और उग्र होगा” – संघ का ऐलान!
एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी और प्रदेश प्रवक्ता पूरन दास ने कड़े शब्दों में कहा –
“इस स्थिति के लिए पूरी तरह सरकार जिम्मेदार है। अड़ियल रवैया छोड़कर तुरंत संवाद करे और हमारी 10 सूत्रीय मांगों पर लिखित आदेश जारी करे, वरना आंदोलन को राजधानी में और व्यापक बनाया जाएगा।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले 20 माह में कर्मचारियों ने 150 से अधिक बार आवेदन और निवेदन किया, लेकिन सरकार ने नियमितीकरण, ग्रेड पे और लंबित 27% वेतन वृद्धि जैसी फाइलों को जानबूझकर रोक दिया है।
राजधानी में बड़ा प्रदर्शन तय!
संघ ने साफ़ कर दिया है कि अब आंदोलन जिला स्तर से राजधानी में प्रवेश करेगा। रायपुर में विशाल रैली और प्रदर्शन की तैयारी चल रही है। सूत्रों का कहना है कि अगले सप्ताह तक हजारों कर्मचारी राजधानी की सड़कों पर उतरेंगे। प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, लेकिन सरकार अब भी चुप्पी साधे हुए है।
जनता का सवाल – स्वास्थ्य या राजनीति?
मरीजों की भीड़ रोज़ बढ़ती जा रही है। कोई अपने बीमार बच्चे को लेकर भटक रहा है, तो कोई ऑपरेशन की तारीख आगे बढ़ने से परेशान है। इस बीच सवाल उठने लगे हैं कि सरकार की प्राथमिकता जनता का स्वास्थ्य है या राजनीतिक दिखावा? आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो “धरना स्थल से सड़कों तक और सड़कों से विधानसभा तक संघर्ष की ज्वाला फैलेगी।”
टकराव की ओर बढ़ता संघर्ष!
NHM आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है। 10वें दिन की यह जंग सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव का खुला ऐलान है। एक ओर जनता इलाज को तरस रही है, दूसरी ओर सरकार चुप्पी साधे बैठी है। हालात ऐसे हैं कि आने वाले दिनों में राजधानी रायपुर आंदोलन का रणक्षेत्र बन सकता है।
अगर सरकार ने तत्काल लिखित आदेश जारी नहीं किया, तो “सफ़ेद कोट की यह ज्वाला” राजधानी को झकझोर देगी और इसका खामियाजा न केवल सरकार बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र को भुगतना पड़ेगा।