देवघर में श्रद्धा बनी शोक—कांवड़ियों से भरी बस ट्रक से टकराई, 18 शवों पर टूटा आसमान, सड़क पर बिछ गईं चीत्कारें!
Jhaarkhand/देवघर मंगलवार सुबह की पहली किरण के साथ ही एक दिल दहला देने वाली ख़बर ने पूरे देश को झकझोर दिया। श्रद्धा की राह पर निकले कांवड़ियों की बस गैस सिलेंडर से भरे ट्रक से टकरा गई और देखते ही देखते तीर्थ यात्रा मातम में बदल गई। हादसा इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर लाशों और कराहों का मंजर फैल गया।
यह भीषण दुर्घटना देवघर जिले के मोहनपुर थाना क्षेत्र के जमुनिया गांव के पास तड़के करीब 4:30 बजे हुई। कांवड़ियों से भरी बस बिहार से देवघर की ओर आ रही थी, जहां श्रद्धालु बाबाधाम मंदिर में जल चढ़ाने के लिए रवाना हुए थे। लेकिन उनकी यह धार्मिक यात्रा अधूरी रह गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में कम से कम 18 कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक गंभीर रूप से घायल हैं। इनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस के ड्राइवर को नींद की झपकी आ गई थी, जिस कारण वह वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। सामने से आ रहे ट्रक से सीधी भिड़ंत हो गई। ट्रक और बस की टक्कर इतनी जोरदार था कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया।
घटना के बाद सड़क पर चारों ओर चीख-पुकार मच गई। जो लोग जख्मी थे, वे दर्द से कराह रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए तुरंत रेस्क्यू शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। मोहनपुर थाना पुलिस, देवघर जिला प्रशासन, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया।
एसडीओ और एसपी ने मौके पर पहुंच कर हालात का जायजा लिया। घायलों को तत्काल देवघर सदर अस्पताल और अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ को बेहतर इलाज के लिए भागलपुर और रांची रेफर किया गया है।
देवघर उपायुक्त ने प्रेस को बताया कि “यह एक अत्यंत दुखद हादसा है। सभी अधिकारी मौके पर हैं। घायलों को हर संभव इलाज दिया जा रहा है। मृतकों की पहचान की जा रही है और उनके परिवारों को सूचित किया जा रहा है।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है।
हादसे में जान गंवाने वाले सभी श्रद्धालु बिहार के अलग-अलग जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं। अधिकतर मृतक और घायल नवयुवक हैं, जो पहली बार देवघर कांवड़ यात्रा के लिए आए थे।
“शोक की इस घड़ी में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्विटर में शोक व्यक्त करते हुए दुख जताया है जिससे बिहार और झारखंड की सरकारें सक्रिय हो गई हैं।”
इस घटना ने एक बार फिर श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐसी धार्मिक यात्राओं के लिए कोई विशेष निगरानी नहीं होनी चाहिए? क्या चालक दल को पर्याप्त विश्राम और जांच नहीं दी जानी चाहिए?
देवघर की धरती, जो सावन के महीने में श्रद्धा और भक्ति से गूंजती है, आज आँसुओं और चीत्कारों की गूंज से थर्रा उठी है। यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि प्रशासन, आयोजन समितियां और श्रद्धालु मिलकर कैसे सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दें।
श्रद्धा की इस बलि को भूलना आसान नहीं होगा।













