Korba/छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से सामने आया तिहरा हत्याकांड न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास और लालच के उस खतरनाक चेहरे को भी उजागर करता है, जिसने तीन जिंदगियों को निगल लिया। तंत्र-मंत्र के नाम पर करोड़पति बनने का सपना दिखाकर रची गई यह साजिश इतनी क्रूर थी कि सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। थाना उरगा क्षेत्र के ग्राम कुदरी स्थित एक फार्म हाउस में 11 दिसंबर की दरमियानी रात जो हुआ, उसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी तांत्रिक आशीष दास ने तंत्र विद्या के जरिए 5 लाख रुपये को 2 करोड़ 50 लाख रुपये में बदलने का झांसा देकर कबाड़ी व्यवसायी असरफ मेमन, नितेश रात्रे और सुरेश साहू को अपने जाल में फंसाया। लालच इतना बड़ा था कि तीनों ने अपनी जान तक की कीमत नहीं समझी। उन्हें बताया गया कि विशेष तांत्रिक अनुष्ठान के बाद धन कई गुना बढ़ जाएगा, बस प्रक्रिया पर भरोसा रखना होगा।
11 दिसंबर की रात, ग्राम कुदरी स्थित असरफ मेमन के फार्म हाउस में तंत्र-मंत्र का नाटक रचा गया। आरोपी तांत्रिक आशीष दास अपने साथ नायलॉन की रस्सी, नींबू, नारियल, अगरबत्ती और अन्य तांत्रिक सामग्री लेकर वहां पहुंचा। फार्म हाउस के कमरे को उसने तांत्रिक साधना का केंद्र बताया और सह-आरोपियों को निर्देश दिया कि वे कमरे के बाहर रस्सी पकड़कर खड़े रहें। अंदर क्या हो रहा है, यह जानने की किसी को इजाजत नहीं थी।
सबसे पहले नितेश रात्रे को तंत्र-मंत्र की प्रक्रिया के बहाने कमरे के अंदर बुलाया गया। जैसे ही वह बैठा, उसके गले में नायलॉन की रस्सी डाली गई। बाहर खड़े सह-आरोपियों ने रस्सी को पूरी ताकत से खींचा। कुछ ही पलों में नितेश की सांसें थम गईं। उसकी मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन बाहर खड़े लोग इसे तांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा समझते रहे या फिर लालच में आंखें मूंदे खड़े रहे।
इसके बाद यही खौफनाक तरीका असरफ मेमन और सुरेश साहू के साथ दोहराया गया। तंत्र-मंत्र का भ्रम रचते हुए उन्हें एक-एक कर कमरे में बुलाया गया और नायलॉन रस्सी से गला घोंटकर उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों की मौत के बाद फार्म हाउस में सन्नाटा पसर गया। तांत्रिक अनुष्ठान की जगह वह कमरा मौत का अड्डा बन चुका था।
घटना के बाद जब सच्चाई सामने आई तो परिजनों ने आनन-फानन में तीनों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक साथ तीन मौतों की खबर से इलाके में हड़कंप मच गया। प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस को जल्द ही कुछ गहरे राज़ की बू आने लगी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने तत्काल विशेष जांच टीम गठित की। बारीकी से की गई जांच, मोबाइल कॉल डिटेल्स, घटनास्थल के साक्ष्य और आरोपियों से पूछताछ के बाद पूरा षड्यंत्र सामने आ गया। यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित तिहरा हत्याकांड था।
थाना उरगा में इस मामले में अपराध क्रमांक 544/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 61(2), 3(5) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया। पुलिस ने तांत्रिक आशीष दास सहित कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त नायलॉन रस्सी, तंत्र-मंत्र की सामग्री, मोबाइल फोन, मोटरसाइकिल, स्कूटी, इनोवा कार और 5 लाख रुपये नगद सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई है।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर समाज में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को कैसे आसानी से गुमराह किया जा रहा है। लालच में फंसे लोग अपनी सूझ-बूझ खो बैठते हैं और नतीजा इतना भयावह हो जाता है कि तीन परिवार उजड़ जाते हैं।
“नीतेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, कोरबा ने बताया कि, “यह मामला पूरी तरह से सुनियोजित हत्या का है। तंत्र-मंत्र के नाम पर पैसे दोगुने-तिगुने करने का झांसा देकर तीनों की हत्या की गई। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।”
कोरबा का यह तिहरा हत्याकांड न सिर्फ अपराध की एक कहानी है, बल्कि यह चेतावनी भी है—लालच और अंधविश्वास अगर विवेक पर हावी हो जाएं, तो उनका अंत अक्सर मौत और तबाही में ही होता है।













