March 1, 2026 11:57 pm

जनजातीय गौरव दिवस पर बागबाहरा में अद्वितीय उत्सव की गूंज…जनजातीय नायकों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज विकास का संकल्प!

जनजातीय गौरव दिवस पर बागबाहरा में अद्वितीय उत्सव की गूंज…जनजातीय नायकों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज विकास का संकल्प! 

Bagbahra/ जनपद पंचायत बागबाहरा का प्रांगण आज जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक और रोमांचकारी दृश्य का साक्षी बना। मंच पर सजे जनजातीय नायकों के चित्र, ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित जनसमुदाय और वातावरण में तैरती अदम्य उत्साह की लहर… सब मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे थे मानो वीरता स्वयं धरती पर उतर आई हो।
मुख्य अतिथि के रूप में जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर की गरिमामयी उपस्थिति, अध्यक्षता कर रहे उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार, और मंचासीन विशेष अतिथियों—महिला बाल विकास विभाग की सभापति मधुलिका चंद्राकर, भूमिका रामलाल सिन्हा, भूपेंद्र दीवान और भगवती राजकुमार ठाकुर—ने कार्यक्रम को गौरव का unmatched ऊँचाई प्रदान की।

बिरसा मुंडा, वीरनारायण और गुण्डाधुर को नमन…

पूजन-वंदन से शुरू हुआ ‘गौरव’ का महाआयोजन**
कार्यक्रम की शुरुआत धरतीपुत्र बिरसा मुंडा, जनविद्रोह के अग्रदूत वीरनारायण, और अद्वितीय नेतृत्व के प्रतीक गुण्डाधुर के पूजन-वंदन से हुई। जनजातीय परंपराओं के अनुरूप दीप प्रज्वलन और मंत्रोच्चारण ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। मानो शौर्य और बलिदान की अमर आत्माएँ कार्यक्रम को आशीर्वाद देने स्वयं उपस्थित हो गई हों।
जनपद सीईओ एम.एल. मंडावी और एडिशनल सीईओ जी.आर. बरिहा ने अपने उद्बोधन में जनजातीय नायकों के संघर्ष की गाथा इतनी प्रभावशाली ढंग से रखी कि सभा में बैठे हर व्यक्ति की आँखों में गर्व की चमक उभर आई। उन्होंने बताया कि यह दिवस सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी जड़ों, हमारी पहचान और हमारी संस्कृति का महापर्व है।

“कर्म ही मनुष्य की असली पहचान”—उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार!
अपने भाषण में उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार ने समाज में फैलते जातिवाद के खिलाफ सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा—

“मनुष्य का मूल्य उसकी जाति से नहीं, उसके कर्म से तय होता है। समाज में सद्भाव और विकास तभी संभव है जब हम जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता का मार्ग अपनाएं।”

उनके इस विचार से सभा में उपस्थित युवाओं और महिलाओं में विशेष ऊर्जा का संचार हुआ।

“जनजातीय नायक राष्ट्र की रीढ़”—मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर!
मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर ने अपने भावनापूर्ण संबोधन में जनजातीय नायकों को महान राष्ट्रनायक बताते हुए कहा—

“उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज हित में कार्य करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। आज हम सब मिलकर उनके त्याग, साहस और त्याग की अमर गाथाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।”

उन्होंने उपस्थित जनसमूह को समाज निर्माण और जनहित के कार्यों में सक्रिय योगदान देने की शपथ भी दिलाई। सभा में एक पल को ऐसा प्रतीत हुआ मानो एक नया संकल्प, नई चेतना और नई दृष्टि पूरे जनसमुदाय में फैल गई हो।

जनजातीय संस्कृति संरक्षण पर जोर—मीना चंद्राकर!

महिला बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी मीना चंद्राकर ने अपने वक्तव्य में पारंपरिक जनजातीय संस्कृति, कला, पहनावा और जीवनशैली को भविष्य पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने पर जोर देते हुए कहा—

“गौरव दिवस जैसे आयोजन जनजातीय अस्मिता को मजबूत करते हैं। संस्कृति को जीवित रखना ही इसे सच्चा सम्मान है।”

सम्मान का स्वर्ण पल…
जनजातीय नायक-नायिकाओं और कर्मयोगियों का हुआ अलंकरण कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए जनजातीय समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई नायक-नायिकाओं को श्रीफल, शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान मंच तालियों से गूंज उठा।
मुख्य अतिथि ने महिला एवं बाल विकास विभाग में उत्कृष्ट कार्य कर रहीं परियोजना अधिकारी मीना चंद्राकर, पर्यवेक्षक भावना गुप्ता, रमा अग्रवाल, जामिनी बरिहा, सरोजिनी आदित्य, नूतन ध्रुव, हीरा ध्रुव, चित्रा शर्मा, मनिका ठाकुर, शकुंतला चौहान, तुलेश्वरी खूंटे, सीमा नायक, रूपा पारेशर सहित अनेक कर्मयोगियों को आदि कर्मयोगी अभियान में विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।
मंच पर सम्मानित होते इन कर्मवीरों की आँखों में गर्व और कंधों पर कर्तव्य का वजन साफ झलक रहा था।

मंच संचालन में दिखी कुशलता!
करो रोपण अधिकारी ऐकाल देव निषाद ने अपने प्रभावी और संतुलित संचालन से पूरे कार्यक्रम को जोड़कर रखा। उन्होंने उत्साह, जिम्मेदारी और अनुशासन—तीनों का ऐसा समन्वय प्रस्तुत किया कि कार्यक्रम सहज, सुचारु और प्रभावशाली बना रहा।

संकल्पों से भरा एक अविस्मरणीय दिन!
बागबाहरा में मनाया गया यह जनजातीय गौरव दिवस सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय शौर्य, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव बनकर उभरा।
यह वह क्षण था जब समाज ने एक आवाज में कहा—
“हम अपने नायकों की राह पर चलेंगे, हम अपनी संस्कृति को गर्व से जिएंगे!”
संकल्प, सम्मान और संस्कृति से भरा यह दिन आने वाले वर्षों में प्रेरणा का स्तम्भ बनेगा—यही इस आयोजन की वास्तविक सफलता है।

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