जंगल से जुड़ा नेटवर्क, अंधेरे से निकली रोशनी: बीजापुर के कोंडापल्ली गांव में इतिहास रचा—पहली बार मोबाइल नेटवर्क, टॉवर की हुई पूजा, जश्न में डूबा पूरा इलाका!
Baster/छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के घने जंगलों के बीच बसा कोंडापल्ली गांव—एक ऐसा नाम, जो अब तक नक्शों से ज्यादा कहानियों में जिंदा था। सालों-साल इंतजार, उपेक्षा और संचार के अंधेरे के बाद आखिरकार इस गांव ने विकास की पहली डिजिटल दस्तक सुनी। तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा से सटे इस सुदूर वनांचल में जब पहली बार मोबाइल नेटवर्क ने काम करना शुरू किया, तो यह सिर्फ एक तकनीकी घटना नहीं रही—यह पूरे गांव के लिए भावनाओं का सैलाब बन गई।
सैकड़ों वर्षों से जंगल, पहाड़ और नदी के बीच सीमित दुनिया में जी रहे कोंडापल्ली के लोगों के लिए यह क्षण ऐतिहासिक था। जैसे ही मोबाइल टॉवर के सक्रिय होने की घोषणा हुई, गांव में उत्साह का विस्फोट सा हो गया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, पुरुष उत्साह से भरे कदमों के साथ और बच्चे आंखों में जिज्ञासा लिए टॉवर स्थल की ओर चल पड़े। किसी के हाथ में फूल थे तो किसी के सिर पर नारियल—क्योंकि आज पूजा थी, आधुनिकता की पूजा।
मांदर की गूंजती थाप, ढोल की लय और लोकगीतों के साथ ग्रामीणों ने टॉवर की पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। यह दृश्य किसी बड़े त्योहार से कम नहीं था। कई बुजुर्गों की आंखें भर आईं—उन्होंने कहा, “हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारे गांव में कभी मोबाइल चलेगा।” कुछ महिलाओं ने तो टॉवर को माथा टेकते हुए इसे “दूर बैठी सरकार की पहली आवाज” तक कह डाला।
इस अनोखे उत्सव में केवल कोंडापल्ली ही नहीं, बल्कि आसपास के कई दूरदराज गांवों के लोग भी शामिल हुए। सबके चेहरे पर एक ही भाव था—अब वे भी दुनिया से जुड़ गए हैं। मोबाइल नेटवर्क उनके लिए सिर्फ फोन कॉल या इंटरनेट नहीं, बल्कि सम्मान, पहचान और अधिकारों की राह है। ग्रामीणों ने कहा कि अब वे समय पर अपने परिवार से बात कर पाएंगे, योजनाओं की जानकारी मिलेगी और अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे।
इस खुशी में सुरक्षा बलों के जवान भी पीछे नहीं रहे। लंबे समय से इस इलाके में तैनात जवानों ने ग्रामीणों के साथ मिठाइयां बांटीं, बच्चों को मोबाइल में वीडियो दिखाए और इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बने। जवानों का कहना था कि यह सिर्फ नेटवर्क नहीं, बल्कि भरोसे की मजबूत डोर है, जो शासन और जनता को जोड़ती है।
कोंडापल्ली गांव की सच्चाई यह है कि यहां वर्षों से न सड़क थी, न बिजली और न ही शुद्ध पेयजल की स्थायी सुविधा। महज दो महीने पहले ही गांव तक पहली बार बिजली पहुंची थी। बिजली आने के बाद बच्चों की रात की पढ़ाई संभव हुई, छोटे-छोटे व्यवसायों की उम्मीद जगी और जीवन की गति में बदलाव दिखने लगा। और अब मोबाइल नेटवर्क—जिसने इस बदलाव को नई रफ्तार दे दी है।
अब यही नेटवर्क गांव के लिए बैंकिंग, आधार, राशन, स्वास्थ्य सेवाएं, पेंशन योजनाएं और शिक्षा का प्रवेश-द्वार बनेगा। ऑनलाइन पंजीयन, सरकारी योजनाओं की जानकारी और आपात स्थितियों में तुरंत संपर्क—ये सभी सपने अब साकार होने लगे हैं।
यह सब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित नियद नेल्लानार योजना के तहत संभव हो पाया है। इस योजना का उद्देश्य ही बस्तर और उसके आसपास के दूरस्थ इलाकों तक सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बैंकिंग और संचार जैसी मूलभूत सेवाओं को तेजी से पहुंचाना है। बीते दो वर्षों में इस दिशा में अभूतपूर्व काम हुआ है।
आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं। पिछले दो वर्षों में कुल 728 नए मोबाइल टॉवर स्थापित किए गए हैं। इनमें 116 टॉवर एलडब्ल्यूई कार्यक्रम के अंतर्गत, 115 टॉवर आकांक्षी जिलों में, जबकि 467 टॉवर 4% नेटवर्क कवरेज के तहत लगाए गए हैं। इसके अलावा 449 टॉवरों को 2% से 4% नेटवर्क क्षमता में उन्नत किया गया है। यह आंकड़े नहीं, बल्कि उन गांवों की चुप्पी टूटने की कहानी हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर कहा, “हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर का हर गांव और हर परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े। डिजिटल सुविधाएं वहां तक पहुंचे जहां कभी केवल खामोशी थी। यह सिर्फ संचार की शुरुआत नहीं, बल्कि विश्वास, बदलाव और नई संभावनाओं के एक नए युग का आरंभ है।”
कोंडापल्ली आज सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि उस बदलाव का प्रतीक है जिसकी कल्पना कभी केवल घोषणाओं में की जाती थी। मोबाइल टॉवर की वह पहली घंटी जंगल में गूंजी नहीं—वह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए संदेश बन गई कि अब विकास वहां भी पहुंच रहा है, जहां कभी सिर्फ इंतजार था।













