March 1, 2026 7:07 pm

जंगल की गोद में रोमांच का उत्सव: बारनवापारा के हरेली इको रिजॉर्ट में बैंबू राफ्टिंग, कयाकिंग और सफारी ने बदली बलौदाबाजार की तस्वीर”

“जंगल की गोद में रोमांच का उत्सव: बारनवापारा के हरेली इको रिजॉर्ट में बैंबू राफ्टिंग, कयाकिंग और सफारी ने बदली बलौदाबाजार की तस्वीर”

Baloda bazar/रायपुर संभाग और बिलासपुर संभाग के पर्यटकों के लिये खुश खबरी अब नए साल में परिवार के साथ दूर घूमने की जरूरत नहीं है अब आपको बिल्कुल नजदीक में बस्तर की बैंबू राफ्टिंग का मजा मिलने वाला है जो बस्तर नहीं जा पा रहे थे उनको नजदीक बैंबू राफ्टिंग का आनंद प्राप्त होगा।छत्तीसगढ़ अब सिर्फ घने जंगलों और खनिज संपदा का प्रदेश नहीं रहा, बल्कि यह तेजी से एडवेंचर और इको-टूरिज्म की नई राजधानी बनता जा रहा है। इसी बदलाव की सबसे सशक्त मिसाल बनकर उभरा है बारनवापारा अभयारण्य से महज 10 किलोमीटर दूर स्थित हरेली इको रिजॉर्ट, जहां अब प्रकृति केवल देखने की चीज नहीं, बल्कि महसूस करने का रोमांच बन चुकी है।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की दूरदर्शी पहल से हरेली इको रिजॉर्ट आज बैंबू राफ्टिंग, कयाकिंग और जंगल सफारी का ऐसा संगम बन गया है, जो पर्यटकों को शहरों की भागदौड़ से खींचकर जंगल की शांति और रोमांच की गोद में ले आता है।

जंगल में सुकून, झील में रोमांच!

हरेली इको रिजॉर्ट अब केवल ठहरने का ठिकाना नहीं, बल्कि यह प्रकृति, साहस और संस्कृति का जीवंत मंच बन चुका है। चारों ओर फैले साल और सागौन के जंगल, पक्षियों की मधुर चहचहाहट और झील की लहरों पर तैरता बांस का बेड़ा—यह दृश्य किसी सपने से कम नहीं। यहां आने वाला हर पर्यटक यह महसूस करता है कि वह कंक्रीट के जंगल से निकलकर असली जंगल में सांस ले रहा है।

छत्तीसगढ़ का दूसरा, बलौदाबाजार का पहला बैंबू राफ्टिंग स्थल!

अब तक छत्तीसगढ़ में बैंबू राफ्टिंग का नाम आते ही बस्तर की तस्वीर उभरती थी। कांगेर घाटी क्षेत्र में यह अनुभव पर्यटकों को बरसों से लुभाता रहा है। लेकिन फरवरी 2025 से हरेली इको रिजॉर्ट ने इतिहास रच दिया।बलौदाबाजार जिले को मिला पहला और प्रदेश का दूसरा बैंबू राफ्टिंग स्थल, जहां शांत प्राकृतिक झील में बांस से बनी नावों पर सवार होकर पर्यटक रोमांच और सुकून का अनोखा मेल महसूस कर रहे हैं। यह राफ्टिंग किसी उफनती नदी में नहीं, बल्कि 8 से 15 फीट गहरी शांत झील में होती है, जिससे यह हर उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित और आनंददायक बन जाती है।

सुरक्षा में कोई समझौता नहीं!

रोमांच के साथ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। हर पर्यटक के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य है और हर नाव के साथ प्रशिक्षित गाइड मौजूद रहते हैं। खास बात यह है कि ये गाइड आसपास के गांवों के स्थानीय युवा हैं, जिन्हें टूरिज्म बोर्ड ने बाकायदा प्रशिक्षण दिया है। इससे न केवल पर्यटकों को भरोसेमंद अनुभव मिल रहा है, बल्कि गांव के युवाओं को रोजगार और आत्मसम्मान भी मिला है।

कयाकिंग और जंगल सफारी: रोमांच की दोहरी खुराक
बैंबू राफ्टिंग के साथ-साथ कयाकिंग ने हरेली की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया है। झील के शांत पानी में पैडल चलाते हुए युवाओं के चेहरे पर उत्साह साफ नजर आता है।
इसके अलावा, पास ही स्थित बारनवापारा अभयारण्य की जंगल सफारी पर्यटकों के लिए किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं। हिरण, नीलगाय, जंगली सूअर और रंग-बिरंगे पक्षी प्राकृतिक वातावरण में दिखाई देते हैं, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं।

केरल मॉडल पर विकसित हो रहा छत्तीसगढ़ का इको-टूरिज्म!

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड इस रिजॉर्ट को केरल की तर्ज पर इको-टूरिज्म मॉडल के रूप में विकसित कर रहा है। बोर्ड की जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे के अनुसार, आने वाले समय में यहां कैंपिंग, ट्रेकिंग और नेचर वॉक जैसी गतिविधियां भी शुरू की जाएंगी। पर्यटक जंगल के बीच टेंट लगाकर रात बिता सकेंगे और प्रकृति को बेहद करीब से महसूस कर पाएंगे।

सोलर एनर्जी से चलने वाला आदर्श इको रिजॉर्ट
हरेली इको रिजॉर्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह सोलर एनर्जी पर आधारित है। वर्ष 2008 से यहां 110 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल सिस्टम कार्यरत है। बिजली की जरूरतें सूर्य की ऊर्जा से पूरी होती हैं, जिससे यह स्थान पर्यावरण संरक्षण का जीता-जागता उदाहरण बन गया है।

बैंबू राफ्टिंग बारनयापारा अभयारण आधुनिक सुविधाएं, लेकिन प्रकृति से समझौता नहीं
करीब 4.5 एकड़ में फैला यह रिजॉर्ट आधुनिक सुविधाओं से लैस है—15 से अधिक एसी कमरे, 6 नॉन-एसी कूलर वाले कमरे, दो बड़े लॉन, रेस्टोरेंट और लगभग 50 लोगों के ठहरने की व्यवस्था। इसके बावजूद यहां का स्वरूप पूरी तरह प्राकृतिक रखा गया है, ताकि सुकून में कोई खलल न पड़े।

स्थानीय रोजगार की मिसाल!

हरेली इको रिजॉर्ट का हर कर्मचारी स्थानीय है—चाहे वह गार्ड हो, सफारी गाइड, राफ्टिंग स्टाफ या रेस्टोरेंट कर्मचारी। पर्यटन के जरिए स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाना छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का मूल उद्देश्य है, और हरेली इस सोच को जमीन पर उतारता नजर आता है।

12 महीने खुला, सालभर स्वागत!

जहां बारनवापारा अभयारण्य साल में लगभग 6 महीने ही खुला रहता है, वहीं हरेली इको रिजॉर्ट पूरे 12 महीने पर्यटकों के लिए खुला रहता है। यही वजह है कि यह स्थान अब अभयारण्य से अलग अपनी स्वतंत्र पहचान बना चुका है।

छत्तीसगढ़ी संस्कृति से सीधा जुड़ाव!

यहां आने वाले पर्यटक केवल रोमांच नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति, खानपान और ग्रामीण सादगी का भी अनुभव करते हैं। यही आत्मीयता हरेली को खास बनाती है।

पर्यटन के नक्शे पर बलौदाबाजार की नई पहचान!

बैंबू राफ्टिंग, कयाकिंग, जंगल सफारी, सोलर एनर्जी और स्थानीय रोजगार—इन सभी को एक सूत्र में बांधकर हरेली इको रिजॉर्ट ने बलौदाबाजार को पर्यटन के नक्शे पर मजबूती से दर्ज कर दिया है।
अब यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आने वाले वर्षों में बारनवापारा और हरेली इको रिजॉर्ट छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित इको-एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में उभरेंगे, जहां जंगल केवल दिखेगा नहीं—बल्कि दिल में उतर जाएगा।

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