March 2, 2026 5:15 am

श्री गंधेश्वर धार्मिक ट्रस्ट में सरकारी धन दोहन बनी बोनस घोटाले की गूंज —फर्जी बोनस घोटाले की गूंज में दबा सच, प्रशासन और जांच समिति की चुप्पी बनी रहस्य!”

श्री गंधेश्वर धार्मिक ट्रस्ट में सरकारी धन दोहन बनी बोनस घोटाले की गूंज —फर्जी बोनस घोटाले की गूंज में दबा सच, प्रशासन और जांच समिति की चुप्पी बनी रहस्य!”

Mahasamund/जिले के ऐतिहासिक और आस्था से ओतप्रोत सिरपुर स्थित गंधेश्वर श्री महादेव मूर्ति मंदिर ट्रस्ट में ऐसा घोटाला कुछ दिन पहले उजागर हुआ था, जिसने पूरे प्रशासनिक ढांचे को हिलाकर रख दिया था। श्रद्धा और विश्वास के इस पवित्र केंद्र से “फर्जी बोनस घोटाले” का जिन्न निकला,जिसको लेकर शिकायतकर्ता द्वारा लिखित में संपूर्ण दस्तावेजों को संलग्न कर शिकायत किया थाऔर मामले को संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय टीम बना कर जांच कराने के लिए आवेदन दिया था लेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच समिति द्वारा यह जांच अभी तक क्यों नहीं की गई? इस पूरे मामले में इतनी शिथिल क्यों दिख रही है? क्या शासन को हुए नुकसान की रिकवरी कराने में जांच समिति असमर्थ है, या फिर कोई अंदरूनी सांठगांठ इस जांच को धीमा कर रही है?

लहंगर समिति से निकला भ्रष्टाचार का तार!
मामले की जड़ें सीधे जाकर जुड़ती हैं लहंगर समिति के प्राधिकृत अध्यक्ष तोषण सेन से। तोषण सेन जो खुद समिति के अध्यक्ष है तोषण सेन ने धूर्तता और चालाकी से गंधेश्वर श्री महादेव मंदिर ट्रस्ट की भूमि का पंजीयन अपने नाम पर करा लिया — जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहता है कि यह भूमि ट्रस्ट के नाम से दर्ज होनी चाहिए।इनको अच्छे से मालूम था कि ट्रस्ट के नाम पर पंजीयन कराऊंगा तो बोनस की राशि नहीं मिलेगी यह हल्का पटवारी,समिति प्रभारी और समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर की सुनियोजित चाल थी।

खसरा नंबर 540/2, कुल रकबा 0.2200 हेक्टेयर, और इसके साथ ट्रस्ट भूमि 27.7900 हेक्टेयर — दोनों का पंजीयन तोषण सेन के नाम पर होना, यह दर्शाता है कि कागजों में एक सोचा-समझा खेल खेला गया।

इस दस्तावेजी हेरफेर के बाद, ट्रस्ट की भूमि को कृषि भूमि बताकर बोनस प्राप्त किया गया — यानी शासन के खजाने से भारी भरकम रकम हड़प ली गई!

बोनस का जाल – “कागजों पर ट्रस्ट, जमीन पर तोषण!”
घोटाले की सबसे चौंकाने वाली परत यह है कि जिस भूमि पर बोनस प्राप्त किया गया, वह वास्तव में मंदिर ट्रस्ट की थी। लेकिन दस्तावेज़ों में उसकी मालिकाना हकदारी बदल दी गई। सवाल यह उठता है –

बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव है क्या?

अब जांच के घेरे में पंजीयनकर्ता हल्का पटवारी, समिति प्रभारी, और कंप्यूटर ऑपरेटर भी हैं। इतने बड़े आर्थिक अपराध की जानकारी विभाग तक न पहुंचाना भी अपने आप में बड़ी लापरवाही या फिर जानबूझकर की गई चुप्पी बताई जा रही है।

क्या यह संभव है कि राजनीतिक संरक्षण या ऊपरी दबाव के चलते यह मामला दबाया जा रहा हो?
स्थानीय लोगों का कहना है – “जब बिना मिलीभगत के ट्रस्ट की भूमि निजी नाम पर दर्ज नहीं हो सकती, तो प्रशासन ने आंख मूंदकर क्यों देखा?”

सर्वाकार दाऊलाल चंद्राकर भी भ्रष्टाचार करने के घेरे में!
मामला यहीं खत्म नहीं होता,गंधेश्वर श्री महादेव मूर्ति मंदिर ट्रस्ट के सर्वाकार और अध्यक्ष दाऊलाल चंद्राकर पर भी गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने भी ट्रस्ट की भूमि का पंजीयन अपने नाम पर करा लिया।
नियम यह कहता है कि ट्रस्ट की भूमि पर किसी भी प्रकार का बोनस नहीं दिया जाएगा।फिर भी, नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर फर्जी बोनस प्राप्त किया गया और शासन को लाखों का नुकसान पहुंचाया गया।

लोगों का कहना है कि यह सिर्फ पैसों का घोटाला नहीं, बल्कि “आस्था” के नाम पर विश्वास की हत्या है!

आस्था बनाम लालच – सिरपुर का सवाल!
सिरपुर का गंधेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की भावनाओं का केंद्र है।
लेकिन जब उसी मंदिर के नाम पर लूट और फरेब का जाल बिछाया गया हो, तो लोगों के मन में आक्रोश उमड़ना स्वाभाविक है।गांव और आसपास के क्षेत्र में अब यह सवाल गूंज रहा है –

• क्या “गंधेश्वर ट्रस्ट” के नाम पर लालच और फर्जी बोनस की लूट खेली गई?
• क्या ट्रस्ट के नाम पर सरकारी खजाने को लूटा गया?
• और आखिर जांच समिति इस गंभीर अपराध पर मौन क्यों है?
•क्या जिलाधीश इस मामले को लेकर गंभीर नही है?
•या क्या जांच समिति सीधा अपने जिलाधीश के आदेशों की अवहेलना कर रही है?

शासन को मिली चुनौती – “ट्रस्ट भूमि पर बोनस कैसे?”
नियमों के अनुसार, ट्रस्ट या धार्मिक संस्थाओं की भूमि पर कोई बोनस भुगतान नहीं किया जा सकता।
इसके बावजूद बोनस प्राप्त किया गया, जिससे न सिर्फ शासन को आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि प्रशासन की साख पर भी सवाल उठ गए।यह सीधे-सीधे नीतिगत उल्लंघन और भ्रष्टाचार की साजिश का मामला है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष हुई, तो कई और बड़े नाम उजागर होंगे, जिनके तार सीधे उच्च पदस्थ अधिकारियों और राजनैतिक चेहरों से जुड़े हो सकते हैं।

सिरपुर की जनता में आक्रोश – “दोषियों को सजा दो!

सिरपुर और आसपास के क्षेत्रों में इस खुलासे के बाद जनाक्रोश चरम पर है कि इतना बड़ा भ्रष्टाचार होने के बाद जिला प्रशासन मौन क्यों है?

•क्यों अभी तक समिति के अध्यक्ष ,हल्का पटवारी,समिति प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर के ऊपर कार्यवाही नहीं किया गया?क्या इनको कोई राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है जिससे अभी तक इनके ऊपर कोई भी प्रकार की कार्यवाही नहीं किया गया?

“गंधेश्वर मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक है। इसके नाम पर धोखाधड़ी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अब मांग उठ रही है कि उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और सभी दोषियों की संपत्ति जब्त कर शासन को हुई क्षति की भरपाई की जाए।

जांच समिति की चुप्पी पर उठे सवाल!

•अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच समिति कार्रवाई में ढिलाई क्यों बरत रही है?
•क्या जांच समिति जिला कलेक्टर के आदेशों को नजरअंदाज कर रही है?
•या फिर यह मामला जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है?

स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता से लोगों में यह धारणा बन रही है कि सत्ता संरक्षण के कारण जांच धीमी की जा रही है।

आगे क्या? – जनता की निगाहें प्रशासन पर!
अब पूरा जिला यह देख रहा है कि क्या जिला कलेक्टर स्वयं संज्ञान लेंगे, या फिर यह मामला भी अन्य भ्रष्टाचार कांडों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा।यदि शासन ने समय रहते कदम नहीं उठाया, तो यह मामला न केवल राजनीतिक तूफान बन सकता है, बल्कि आस्था की नींव को भी हिला देगा।

गंधेश्वर मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा यह बोनस घोटाला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ है।
अब यह प्रशासन पर निर्भर है कि वह इस आस्था बनाम भ्रष्टाचार की लड़ाई में किसके साथ खड़ा होता है –सत्य और न्याय के साथ या फिर भ्रष्ट तंत्र के संरक्षण में!

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