“कांग्रेस में अनुशासन का बिगुल! मनरेगा संग्राम के मंच से उठा विवाद, जनपद सदस्य सृष्टि ध्रुव 6 वर्षों के लिए निष्कासित, संगठन में मचा सियासी भूचाल”
Mahasamund/कांग्रेस संगठन में अनुशासन को लेकर एक बार फिर कड़ा संदेश सामने आया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पटेवा, झलप एवं सिरपुर द्वारा लिया गया एक ऐतिहासिक और सख्त निर्णय अब जिले की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। मनरेगा संग्राम कार्यक्रम के समापन अवसर पर पार्टी के सर्वोच्च प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी में जिस प्रकार मर्यादा, अनुशासन और संगठनात्मक गरिमा को तार-तार किया गया, उसने कांग्रेस के भीतर एक गहरे मंथन को जन्म दे दिया है।
दिनांक 24 जनवरी 2026 को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष खिलावन साहू द्वारा जिलाध्यक्ष माननीय द्वारिकाधीश यादव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट शब्दों में उल्लेख किया गया है कि जनपद सदस्य सृष्टि ध्रुव द्वारा मनरेगा संग्राम कार्यक्रम के दौरान पार्टी पदाधिकारियों के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग एवं दुर्व्यवहार किया गया। यह घटना केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि पार्टी की सार्वजनिक छवि, अनुशासन और वैचारिक मूल्यों पर सीधा प्रहार बन गई।
प्रदेश अध्यक्ष की उपस्थिति में हुआ विवाद, संगठन स्तब्ध!
मनरेगा संग्राम कार्यक्रम, जिसे कांग्रेस द्वारा श्रमिकों, गरीबों और ग्रामीण जनता की आवाज़ के रूप में प्रस्तुत किया गया था, उसी मंच से अनुशासनहीनता की चिंगारी भड़क उठी। प्रदेश अध्यक्ष की उपस्थिति में पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों के साथ कथित तौर पर अपशब्दों का प्रयोग और दुर्व्यवहार किया जाना संगठन के लिए असहनीय माना गया। मंच पर घटित इस घटनाक्रम ने न केवल कार्यकर्ताओं को आहत किया, बल्कि वरिष्ठ नेताओं को भी कठोर कदम उठाने के लिए विवश कर दिया।
सर्वसम्मति से लिया गया निष्कासन का फैसला!
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पटेवा, झलप और सिरपुर की आपात बैठक में इस मामले पर गहन विचार-विमर्श हुआ। बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया कि पार्टी में पद और जिम्मेदारी के साथ मर्यादा का पालन अनिवार्य है। अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इसके बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जनपद सदस्य सृष्टि ध्रुव को 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किया जाए।
यह निर्णय केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि संगठन के भीतर एक कड़ा संदेश भी है—कि कांग्रेस में पद से बड़ा अनुशासन है और व्यक्ति से बड़ा संगठन।
मोहित ध्रुव पर भी कार्रवाई की अनुशंसा!
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मोहित ध्रुव की भूमिका की भी जांच आवश्यक है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए प्रकरण को जिलाध्यक्ष के समक्ष सादर प्रेषित किया है। अब सबकी निगाहें जिला कांग्रेस कमेटी के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में मिला-जुला असर!
इस सख्त फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक वर्ग इसे संगठन की मजबूती और अनुशासन की जीत बता रहा है, तो वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक भविष्य पर भारी पड़ने वाला निर्णय मान रहे हैं। हालांकि अधिकांश कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो संगठन में अनुशासनहीनता की प्रवृत्ति हावी हो सकती थी।
अनुशासन बनाम राजनीति: बड़ा सवाल!
यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस संगठन के भीतर एक बड़े सवाल को जन्म देता है—क्या जनप्रतिनिधि होने के नाते मर्यादा और संयम की जिम्मेदारी और अधिक नहीं हो जाती? पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस एक विचारधारा आधारित संगठन है, जहां व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर संगठन की प्रतिष्ठा रखी जाती है।
जिलाध्यक्ष की भूमिका पर टिकी निगाहें!
अब यह मामला जिलाध्यक्ष माननीय द्वारिकाधीश यादव के समक्ष है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में इस प्रकरण पर जिला स्तर से और भी सख्त या स्पष्ट निर्णय सामने आ सकता है। यह निर्णय न केवल संबंधित व्यक्तियों के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि जिले में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति की दिशा भी तय करेगा।
मनरेगा संग्राम कार्यक्रम के मंच से शुरू हुआ यह विवाद अब कांग्रेस संगठन के लिए एक चेतावनी और संदेश दोनों बन चुका है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा लिया गया यह साहसिक कदम यह साबित करता है कि पार्टी अब अनुशासन को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कार्रवाई संगठन को और मजबूत करती है या फिर आंतरिक राजनीति में नई हलचल को जन्म देती है।
एक बात तय है—महासमुंद की राजनीति में यह प्रकरण लंबे समय तक गूंजता रहेगा।












