आधी रात मौत का तांडव:धान की रखवाली कर रहे किसान दंपती पर टूट पड़ा दंतैल हाथी—सूंड से उठाकर पटका, पैरों तले रौंद डाला, गांव में मातम का साया”
Chhattisgarh/अंबिकापुर के सूरजपुर जिले की शांत रात शुक्रवार को अचानक चीख-पुकार और मौत के दिल दहलाने वाले तांडव में बदल गई। भटगांव थाना क्षेत्र के ग्राम कपसरा के बिसाही पोड़ी गांव में किसान कबिलास राजवाड़े और उनकी पत्नी धनियारो को क्या पता था कि अपने खलिहान में काटकर रखे धान की रखवाली करना उन्हें जीवन का अंतिम पहर साबित होगा। रात की नीरवता में जब गांव गहरी नींद में डूबा था, उसी वक्त जंगल की ओर से एक दंतैल हाथी मौत बनकर उनके खलिहान के आसपास मंडराने लगा—और उसके बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके को दहला दिया।
मिट्टी की दीवार ढही… और शुरू हुआ भयावह अध्याय!
कबिलास (45) और धनियारो (41) अपनी रोज़ की तरह खलिहान के पास आम के पेड़ के नीचे बनी मिट्टी की झोपड़ी में सोए हुए थे। बाहर रखे धान की रखवाली करना किसान परिवार का सामान्य रूटीन था, लेकिन उसी रात करीब 2 बजे अचानक झोपड़ी के पास बने मिट्टी के अहाते का हिस्सा ढहने लगा। आवाज इतनी तेज थी कि दंपती नींद से घबराकर बाहर निकल आए। उन्हें लगा होगा कि शायद बारिश की नमी से दीवार कमजोर हो गई होगी, पर उन्हें क्या मालूम था कि उनकी झोपड़ी के ठीक सामने मौत खड़ी होगी।
जैसे ही दोनों ने बाहर पैर रखा, सामने एक विशालकाय दंतैल हाथी खड़ा था। रात के अंधेरे और हाथी की विशाल आकृति ने दंपती को सांसें रोक देने पर मजबूर कर दिया। वे कुछ समझ पाते, इससे पहले ही हाथी ने अपना तांडव शुरू कर दिया।
सूंड से उठाकर जमीन पर पटका… फिर पैरों तले रौंदकर खत्म कर दी जिंदगी!
गांव वालों के अनुसार हाथी बेहद आक्रामक अवस्था में था। उसने पहले कबिलास और फिर उनकी पत्नी धनियारो को सूंड में जकड़कर दूर जमीन पर पटक दिया। इतनी ताकत से पटकने के बाद भी उसका प्रकोप शांत नहीं हुआ—वह दोनों के ऊपर चढ़ गया और पैरों तले दबाकर कई बार रौंदा, जब तक कि उनकी सांसें थम नहीं गईं।
इस निर्मम दृश्य का गवाह कोई नहीं था, पर सुबह ग्रामीणों ने जब दोनों के शव देखे, तो आसपास की मिट्टी, झोपड़ी और रौंदे हुए खलिहान ने रात में हुए भयावह हादसे की पूरी कहानी बयां कर दी।
सुबह का दिल दहलाने वाला मंजर—ग्रामीणों की आंखों में आंसू!
जैसे ही सुबह ग्रामीण खलिहान की ओर पहुंचे, सामने पड़ा मंजर देखकर सभी के पैर कांप गए। मिट्टी में सने दो निर्जीव शव… बिखरे धान के बोरे… टूटी हुई झोपड़ी… और हाथी के भारी भरकम पैरों के निशान। देखते ही देखते खबर आग की तरह पूरे गांव में फैल गई।
गांव के लोग रोते-बिलखते हुए घटनास्थल पर पहुंचते रहे। कुछ महिलाएं चीखते हुए बेहोश हो गईं, तो कुछ पुरुष कबिलास और धनियारो की मौत पर गुस्से से कांप उठे। जंगल से लगे गांवों में हाथियों का आतंक नया नहीं है, पर किसी दंपती को इस तरह मौत के घाट उतार देना गांववासियों को भीतर तक हिला गया।
वन विभाग और पुलिस मौके पर—शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए!
सूचना मिलते ही सूरजपुर वन परिक्षेत्र के रेंजर वन अमले के साथ मौके पर पहुंचे। साथ ही भटगांव थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। शवों को पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिजनों को शव सौंपते समय दृश्य बेहद गमगीन था—पूरे गांव पर मातमी सन्नाटा छा गया।
अकेला विचरण कर रहा दंतैल हाथी—कई गांवों में दहशत!
वन विभाग के अनुसार यह दंतैल हाथी अपनी टोली से बिछड़कर कई दिनों से अकेला विचरण कर रहा है। यह लुंड्रा क्षेत्र से होते हुए प्रतापपुर रोड तक पहुंचा और प्रतापपुर के आसपास के गांवों में भी दिखाई दिया था। ग्रामीणों ने बताया कि घटना वाली रात भी हाथी को सरहरी गांव के पास देखा गया था।
अकेले होने के कारण यह हाथी बेहद चिड़चिड़ा और आक्रामक हो चुका है। जंगल विभाग को आशंका है कि यह आसपास के गांवों में और भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की गई है।
दो बच्चों के सिर से उठी माता-पिता की छाया!
कबिलास और धनियारो के परिवार को सबसे बड़ा झटका उनके बच्चों ने झेला। दो बच्चे जो अपने माता-पिता के सहारे जीवन जी रहे थे, एक ही रात में अनाथ हो गए। गांव के बुजुर्गों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। दमड़ी-दो दमड़ी जोड़कर धान की खेती करने वाले इस दंपती की मौत गांव में जंगल–मनुष्य संघर्ष की त्रासदी की सबसे दर्दनाक मिसाल बन गई है।
ग्रामीणों में गुस्सा—वन विभाग की लापरवाही पर सवाल!
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले कई दिनों से हाथी के गांव के आसपास भटकने की जानकारी थी, लेकिन खेतों और खलिहानों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कुछ ग्रामीण तो इतने नाराज थे कि उन्होंने कहा—
“हाथी पहले से घूम रहा था, लेकिन न गश्त बढ़ी, न अलर्ट जारी हुआ… आखिर कब तक हम डर-डरकर जीते रहेंगे?”
एक और गांव में मातम का साया!
धान की रखवाली करते हुए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे पति-पत्नी की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। जंगल से लगे गांवों में हाथियों से टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, और यह हादसा उन अनगिनत दर्दनाक घटनाओं में एक और काली स्याही की तरह दर्ज हो गया है।
गांव के लोग आज भी पूछ रहे हैं—
“कब रुकेगा यह हाथियों का आतंक? कब सुरक्षित होंगे हमारे खेत, हमारे घर… और हमारी जानें?”
यह सवाल अब भी हवा में तैर रहा है, लेकिन इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं।













