“दोस्ती से दुश्मनी तक… खट्टी जंगल में खून की साजिश! गाली का बदला बना मौत का खेल, तीन दोस्तों ने मिलकर उतारा मौत के घाट!”
महासमुंद।छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खट्टी जंगल की खामोशी को चीरती एक ऐसी खौफनाक साजिश सामने आई है, जिसने दोस्ती, भरोसे और इंसानियत तीनों को शर्मसार कर दिया। 6 अप्रैल 2026 को जब जंगल के भीतर एक अज्ञात युवक का शव मिला, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मामला इतनी भयावह सच्चाई को उजागर करेगा—जहां दोस्त ही दुश्मन बन बैठे थे और मामूली गाली-गलौज ने एक युवक की जिंदगी छीन ली।
यह कहानी है 23 वर्षीय युवक प्रकाश पटेल की, जो खैराभांठा का रहने वाला था। उसका शव खट्टी जंगल के एक सुनसान हिस्से में संदिग्ध अवस्था में मिला। शव की हालत देखकर ही यह स्पष्ट हो गया था कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि एक निर्मम हत्या थी। चेहरे, सीने और गर्दन पर गहरे चोट के निशान, और गले में कसकर बंधा पीला गमछा—यह दृश्य किसी भी दिल को दहला देने के लिए काफी था।
सूचना मिलते ही महासमुंद पुलिस हरकत में आई। मौके पर पहुंचकर शव का पंचनामा किया गया और जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। शुरुआती जांच में ही हत्या की पुष्टि हो गई और पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
ब्लाइंड मर्डर बना पुलिस के लिए चुनौती!
यह मामला पूरी तरह “ब्लाइंड मर्डर” था—न कोई प्रत्यक्ष गवाह, न कोई स्पष्ट सुराग। लेकिन महासमुंद पुलिस ने इसे चुनौती के रूप में लिया और हर पहलू पर बारीकी से जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक के अंतिम समय में साथ रहने वाले दोस्तों से पूछताछ की। यहीं से कहानी ने करवट ली। पूछताछ में खुलासा हुआ कि घटना की रात मृतक प्रकाश पटेल के साथ काजू उर्फ चन्द्रहास नेताम और गोपाल प्रधान देखे गए थे, जिन्होंने रात करीब 12 बजे उसके साथ बहस की थी और फिर उसे अपने साथ मोटरसाइकिल पर लेकर चले गए थे।
“यह सुराग पुलिस के लिए निर्णायक साबित हुआ।”
पुरानी रंजिश ने ली खतरनाक शक्ल!
जांच आगे बढ़ी तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया—यह हत्या किसी अचानक हुए झगड़े का परिणाम नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी।
दरअसल, करीब एक महीने पहले चारों—प्रकाश पटेल, काजू नेताम, गोपाल प्रधान और जलंधर सोनवानी—एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। उसी दौरान नशे की हालत में प्रकाश ने अपने दोस्तों को मां-बहन की गालियां दे दी थीं। यह अपमान तीनों के दिल में गहराई से बैठ गया और उन्होंने उसी वक्त बदला लेने की ठान ली।
समय बीतता गया, लेकिन बदले की आग ठंडी नहीं हुई। 5 अप्रैल 2026 को जब आरोपियों को पता चला कि प्रकाश खैरा के गायत्री मंदिर के पास है, तो उन्होंने अपनी साजिश को अंजाम देने का फैसला कर लिया।
साजिश का खौफनाक अंजाम!
काजू और गोपाल, जलंधर की मोटरसाइकिल लेकर मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने पहले प्रकाश के साथ मारपीट की और फिर उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर खट्टी जंगल की ओर ले गए।
जंगल की सुनसान और अंधेरी जगह पर उन्होंने अपनी हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। कांच की बोतल और पत्थरों से प्रकाश पर ताबड़तोड़ हमला किया गया। वह चीखता रहा, बचने की कोशिश करता रहा, लेकिन उसके अपने ही दोस्त उसकी जान लेने पर आमादा थे।
इतना ही नहीं, उन्होंने गले में गमछा कसकर उसकी सांसें भी रोक दीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपी वहां से भाग निकले और वापस जाकर जलंधर सोनवानी को पूरी घटना की जानकारी दी। चौंकाने वाली बात यह रही कि जलंधर ने इस जघन्य अपराध पर कोई पछतावा नहीं जताया, बल्कि आरोपियों की सराहना करते हुए उन्हें पैसे और मोटरसाइकिल देकर फरार होने की सलाह दी।
महासमुंद पुलिस की दबिश और गिरफ्तारी!
घटना के बाद तीनों आरोपी फरार हो गए और गरियाबंद की ओर छिप गए। लेकिन पुलिस ने लगातार दबिश और तकनीकी जांच के जरिए उनके ठिकानों का पता लगा लिया।
आखिरकार, जलंधर सोनवानी को उसके घर से और काजू नेताम व गोपाल प्रधान को गरियाबंद से हिरासत में लिया गया। कड़ी पूछताछ में तीनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस ने घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल स्प्लेंडर (CG 04 QQ 6845) को भी जब्त कर लिया है।
आरोपियों का आपराधिक इतिहास!
जांच में यह भी सामने आया कि तीनों आरोपी पहले से ही आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं और उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। इससे यह साफ हो गया कि यह कोई पहली घटना नहीं थी, बल्कि अपराध इनके स्वभाव का हिस्सा बन चुका था।
प्रकाश की दोस्ती का खौफनाक अंत!
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि दोस्ती के नाम पर लगा एक बड़ा दाग है। जिनके साथ बैठकर खाना-पीना, हंसी-मजाक करना—उन्हीं दोस्तों ने मामूली गाली-गलौज को इतना बड़ा मुद्दा बना लिया कि एक जिंदगी खत्म कर दी।
यह सवाल खड़ा करता है कि क्या आज के समाज में रिश्तों की कीमत इतनी कम हो गई है कि एक छोटी सी बात पर खून-खराबा हो जाए?
न्याय की ओर बढ़ते कदम!
महासमुंद पुलिस ने इस जटिल ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। तीनों आरोपियों—
•चन्द्रहास नेताम उर्फ काजू (21 वर्ष),
•गोपाल प्रधान (20 वर्ष),
•जलंधर सोनवानी (21 वर्ष),
को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
एक सबक, जो समाज को झकझोर दे!
खट्टी जंगल की यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा सबक है। गुस्सा, बदला और अहंकार जब इंसान पर हावी हो जाते हैं, तो वह अपने ही रिश्तों का खून कर बैठता है।
प्रकाश पटेल की मौत एक चेतावनी है—कि छोटी-छोटी बातों को अगर समय रहते नहीं संभाला गया, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है।
महासमुंद पुलिस की तत्परता और सूझबूझ ने भले ही इस रहस्य से पर्दा उठा दिया हो, लेकिन इस घटना की गूंज लंबे समय तक लोगों के दिलों में डर और सवाल दोनों छोड़ जाएगी…।












