April 7, 2026 7:27 pm

भगवान भरोसे चल रही बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग की ‘स्थापना शाखा’या निजी दरबार: नियम-कानून गायब, कर्मचारियों के हक पर बड़ा प्रहार!”

भगवान भरोसे चल रही बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग की ‘स्थापना शाखा’या निजी दरबार: नियम-कानून गायब, कर्मचारियों के हक पर बड़ा प्रहार!”

Bilaspur/छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की जड़ों तक सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय की स्थापना शाखा अब नियमों से नहीं, बल्कि “भगवान भरोसे” चलती नजर आ रही है।

कागजों में जहां शासन के सख्त नियम और दिशा-निर्देश लागू होने चाहिए, वहीं हकीकत में यह शाखा बिना किसी ठोस दस्तावेज, बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया और बिना जवाबदेही के संचालित हो रही है। खुद स्थापना प्रभारी अधिकारी अपने लिखित कथन में इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि यहां नियमों का कोई स्पष्ट निर्धारण ही नहीं है।

पदोन्नति पर ‘गुप्त खेल’ का आरोप!

सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्थापना शाखा के प्रभारी और संबंधित लिपिक द्वारा जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ खुला अन्याय किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, कई कर्मचारी वर्षों से पदोन्नति के पात्र हैं, लेकिन उन्हें जानबूझकर सूची से बाहर रखा जा रहा है। यह आरोप सिर्फ मौखिक नहीं, बल्कि दस्तावेजों के साथ सामने आया है।

01 अप्रैल 2025 की स्थिति में जो अंतिम वरिष्ठता सूची बननी थी, वह 07 जनवरी 2026 को जारी की गई—और उसमें भी केवल 117 कर्मचारियों को शामिल किया गया। जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है।

ब्लॉकों के कई कर्मचारियों को कथित रूप से “कूट रचना” के जरिए सूची से बाहर कर दिया गया। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया है।

नियंत्रण से बाहर संस्थाओं को दी प्राथमिकता!

इस पूरे मामले को और भी संदिग्ध बनाता है एक और तथ्य—वरिष्ठता सूची में उस संस्था को प्राथमिकता दी गई, जो CMHO बिलासपुर के नियंत्रण में ही नहीं आती।

यह संस्था है—क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रशिक्षण केंद्र बिलासपुर:-

जानकारी के अनुसार, वर्ष 1989 से इस प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य को नियुक्ति और पदोन्नति का अधिकार मिला हुआ है। इसके बाद 8 अगस्त 2012 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इन प्रशिक्षण केंद्रों को राज्य स्तर पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की।

फिर 16 सितंबर 2014 को आदेश जारी हुआ कि प्रदेश के 15 जिलों के सभी प्रशिक्षण केंद्रों को राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रशिक्षण संस्थान रायपुर के अधीन कर दिया जाए।अक्टूबर 2014 से यह व्यवस्था लागू भी हो गई, जिसके बाद इन प्रशिक्षण केंद्रों पर CMHO या जॉइंट डायरेक्टर का कोई अधिकार नहीं रह गया।

फिर भी जारी ‘अनधिकृत हस्तक्षेप’!

चौंकाने वाली बात यह है कि इन स्पष्ट आदेशों के बावजूद, बिलासपुर में CMHO और संबंधित अधिकारियों द्वारा इन प्रशिक्षण केंद्रों में अनधिकृत रूप से पदोन्नति, पदस्थापना और अनुकंपा नियुक्तियां दी गईं।अब जब वरिष्ठता सूची जारी हुई, तो इन प्रशिक्षण केंद्रों के कर्मचारियों को भी उसमें शामिल कर लिया गया—जिससे जिले के अन्य कर्मचारियों का हक प्रभावित हुआ।

यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि एक सुनियोजित प्रशासनिक खेल की ओर भी इशारा करता है।

कर्मचारी संघ ने खोला मोर्चा!

इस पूरे मामले के खिलाफ कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने प्रमाण सहित CMHO को शिकायत सौंपते हुए इस सूची को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।संघ का कहना है कि नई अनंतिम वरिष्ठता सूची बनाई जाए, जिसमें केवल CMHO के नियंत्रणाधीन कर्मचारियों को ही शामिल किया जाए। साथ ही, अन्य संभागों से आए कर्मचारियों को वरिष्ठता क्रम में नीचे रखा जाए।

संघ की इस मांग को गंभीरता से लेते हुए CMHO ने पुनः अनंतिम सूची जारी करने पर सहमति भी दे दी है।

प्रभार बदलने की मांग, आंदोलन की चेतावनी!

मामला यहीं नहीं रुका। संघ ने स्थापना प्रभारी अधिकारी और प्रभारी लिपिक को तत्काल हटाने की मांग भी की है।

संघ का कहना है कि जब तक अनुभवी और नियमों की जानकारी रखने वाले अधिकारी को यह जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, तब तक इस तरह की अनियमितताएं जारी रहेंगी।

यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो संघ ने आंदोलन की खुली चेतावनी दी है—जो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।

बैठक में पहुंचे बड़े पदाधिकारी!

इस पूरे मुद्दे को लेकर CMHO, DPM और DAM के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए।

बैठक में रविंद्र तिवारी, प्रफुल कुमार, विनायक चंद्रवंशी, अन्नू राव, विकास शुक्ला सहित कई ब्लॉक अध्यक्ष और कर्मचारी मौजूद रहे।सभी ने एक स्वर में कहा कि अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह मामला पूरे प्रदेश में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

व्यवस्था या अव्यवस्था?

बिलासपुर का यह मामला सिर्फ एक जिले की प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल है।

जब स्वास्थ्य विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ही नियमों की अनदेखी होगी, तो आम जनता को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ेगा—यह सोचने वाली बात है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि CMHO कार्यालय इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है—या फिर यह “भगवान भरोसे” चल रही व्यवस्था यूं ही जारी रहेगी।

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