“प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना पर वेंडर की लापरवाही का साया! सोलर लगाने के बाद भी उपभोक्ता अंधेरे में, 21,500 का बिजली बिल थमाया – क्या निरस्त होगा कंपनी का लाइसेंस?”
Mahasamund/महासमुंद जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल योजना की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि कुछ वेंडरों की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में ला खड़ा किया है। जिस योजना का उद्देश्य देश के हर घर को सौर ऊर्जा से रोशन करना और आम नागरिकों को बिजली बिल से राहत देना है, वही योजना अब कुछ निजी वेंडरों की लापरवाही और उदासीनता के कारण बदनामी का कारण बनती दिखाई दे रही है।
ग्राम पंचायत पटपरपाली के ब्राह्मणडीह निवासी जगत प्रकाश गुप्ता ने इस मामले में विद्युत वितरण विभाग के कार्यपालन यंत्री को लिखित शिकायत सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने केंद्र सरकार की योजना पर भरोसा कर अपने घर की छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगवाया, लेकिन आज वे लाभ मिलने की बजाय आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलने को मजबूर हैं।
आशा की किरण बनी थी योजना!
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना है। योजना के तहत घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन किया जाता है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जाती है। इससे उपभोक्ता के बिजली बिल में भारी कमी आती है।
इसी उम्मीद के साथ ब्राह्मणडीह निवासी जगत प्रकाश गुप्ता ने भी इस योजना के तहत आवेदन किया। उनका उपभोक्ता क्रमांक 1009796188 है और सोलर पोर्टल पर उनका आवेदन क्रमांक GDA/24/25/1497 दर्ज है। उन्होंने रायपुर स्थित GDA Solar Pvt Ltd नामक कंपनी से सोलर सिस्टम लगवाने का अनुबंध किया।
1अप्रैल 2025 को हुआ था अनुबंध !
शिकायत के अनुसार 1 अप्रैल 2025 को जगत गुप्ता ने वेंडर के साथ सोलर पैनल लगाने का अनुबंध किया था। योजना के नियमों के अनुसार तय समय सीमा के भीतर उनके घर पर सोलर रूफटॉप सिस्टम भी लगा दिया गया।
शुरुआत में सब कुछ सामान्य प्रतीत हो रहा था और परिवार को उम्मीद थी कि अब बिजली बिल से राहत मिलेगी। लेकिन असली समस्या यहीं से शुरू हुई।
नेट मीटरिंग में अटका मामला!
सोलर सिस्टम लगाने के बाद सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है नेट मीटरिंग। इसके माध्यम से सोलर पैनल से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजा जाता है और उपभोक्ता के बिल में उसका समायोजन किया जाता है।जगत गुप्ता का आरोप है कि सिस्टम लगाने के बाद वेंडर ने नेट मीटरिंग की प्रक्रिया पूरी कराने में कोई सहयोग नहीं किया। उन्होंने कई बार फोन और संदेश के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कंपनी की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इतना ही नहीं, लगाए गए सोलर सिस्टम में तकनीकी खराबी भी सामने आई, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हो गया।
फोन उठाना भी बंद, सर्विस देने से इनकार!
शिकायत में कहा गया है कि जब भी उन्होंने वेंडर के संपर्क नंबर 7999441512 पर कॉल किया, तो कभी कॉल रिसीव नहीं किया गया और कभी आश्वासन देकर टाल दिया गया।
सोलर सिस्टम में आई तकनीकी समस्या को ठीक कराने के लिए कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन कंपनी का कोई तकनीकी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।इस लापरवाही का परिणाम यह हुआ कि जिस घर में सोलर ऊर्जा से बिजली बिल शून्य होने की उम्मीद थी, वहां उल्टा 21,500 रुपये का बिजली बिल बकाया हो गया।
लोक अदालत से आया नोटिस!
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जगत गुप्ता को लोक अदालत के माध्यम से 21,500 रुपये के बकाया बिजली बिल का नोटिस प्राप्त हुआ।
गुप्ता का कहना है कि पहले भी विभागीय रीडिंग में तकनीकी त्रुटियां हुई थीं, लेकिन उन्होंने ईमानदारी से पूरा भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद अब उन्हें भारी बिल थमा दिया गया है।उनका आरोप है कि यदि वेंडर समय पर नेट मीटरिंग की प्रक्रिया पूरी कर देता और सिस्टम की खराबी ठीक कर देता, तो उन्हें यह आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ता।
वेंडर पर कार्रवाई की मांग!
जगत प्रकाश गुप्ता ने अपनी शिकायत में विद्युत वितरण विभाग से मांग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए।उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि उनके ऊपर आया 21,500 रुपये का बिजली बिल वेंडर से वसूल किया जाए, क्योंकि यह पूरी तरह से वेंडर की लापरवाही का परिणाम है।इसके साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि यदि कोई वेंडर प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को बदनाम कर रहा है, तो क्या ऐसे वेंडरों का लाइसेंस निरस्त नहीं किया जाना चाहिए?
उच्च अधिकारियों को भी भेजी प्रतिलिपि:-
इस शिकायत की प्रतिलिपि राज्य के कई उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है, जिनमें
•मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय,
•छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी,
•और महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह शामिल हैं।
•इससे यह मामला अब प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर होता जा रहा है।
योजना की साख पर सवाल!
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना देश के ऊर्जा भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन यदि वेंडरों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सरकारी योजनाओं पर भरोसा करके निवेश करते हैं। यदि उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़े, तो भविष्य में लोग ऐसी योजनाओं से दूर हो सकते हैं।
अब सबकी नजर प्रशासन पर!
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विद्युत वितरण विभाग और प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा?
•क्या वेंडर की लापरवाही की जांच होगी?
•क्या उपभोक्ता को राहत मिलेगी?
•और सबसे महत्वपूर्ण – क्या प्रधानमंत्री की इस •महत्वाकांक्षी योजना को बदनाम करने वाले वेंडरों के •खिलाफ कड़ा कदम उठाया जाएगा?
इन सवालों के जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन इतना तय है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला केवल एक उपभोक्ता की शिकायत नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जिले में एक बड़ी बहस का विषय बन सकता है।
और तब यह सवाल और जोर से गूंजेगा —
“क्या कुछ लापरवाह वेंडर प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की चमक को धुंधला कर रहे हैं?”












