“खेत में मक्का दिखाना था, उग आई अफीम की ‘फिल्म’ — दुर्ग में कृषि विभाग की ऐसी ‘खेती’ कि अधिकारी भी रह गए दंग!”
अवैध अफीम की फसल पर प्रशासन का हल चला, कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू निलंबित — निरीक्षण की जगह ‘अनुमान’ से चल रहा था विभाग!
Durg/छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में इन दिनों खेतों में फसल से ज्यादा चर्चा अफीम की हो रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि किसान नहीं, बल्कि सरकारी फाइलें ज्यादा लहलहा रही हैं। मामला ऐसा कि जहां गेहूं, चना या धान का प्रदर्शन होना था, वहां अफीम की खेती चुपचाप अपनी “सरकारी निगरानी” में बढ़ती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी।
जब आखिरकार मामला सामने आया तो प्रशासन ने भी कमाल की तेजी दिखाई और कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित कर दिया गया। जांच में पता चला कि खेतों की निगरानी, निरीक्षण और रिपोर्टिंग में ऐसी लापरवाही हुई कि अफीम की फसल शायद विभाग से ज्यादा अनुशासित निकली — समय पर उगी, समय पर बढ़ी और विभाग को पता ही नहीं चला।
दुर्ग जिले के जिस इलाके में अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ हुआ, वहां के खेत अब चर्चा का विषय बन गए हैं। गांव वाले कहते हैं कि “सरकारी योजनाएं तो धीरे-धीरे आती हैं, लेकिन अफीम की खेती बिना अनुमति के ही तेजी से बढ़ गई।”
असल में कृषि विभाग की जिम्मेदारी थी कि खेतों का नियमित निरीक्षण किया जाए, किसानों से बातचीत हो और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचे। लेकिन जांच टीम की रिपोर्ट में जो सामने आया, उसने विभाग की कार्यप्रणाली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।
जांच में पाया गया कि जिन खेतों में कृषि प्रदर्शन कार्यक्रम होना था, वहां सही तरीके से कार्यक्रम कराया ही नहीं गया। खेत का निरीक्षण करने के बजाय कागजों में निरीक्षण ज्यादा होता रहा। इतना ही नहीं, मौके पर किसान का फोटो तक नहीं लिया गया, जो कि विभागीय प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा माना जाता है।
यानी खेत में क्या उग रहा है, यह देखने की जगह फाइलों में क्या लिखा जा रहा है, वही ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया।
इसी बीच प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि जिस स्थान पर कृषि प्रदर्शन होना था, वहां वास्तव में अफीम की खेती चल रही थी। लेकिन इसकी जानकारी समय रहते न तो रिपोर्ट में दर्ज की गई और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।
जब यह पूरा मामला उजागर हुआ तो प्रशासन के लिए यह किसी फिल्मी ट्विस्ट से कम नहीं था — जहां सरकारी योजना के नाम पर खेतों में “फसल प्रदर्शन” होना था, वहां अफीम की खेती का असली प्रदर्शन चल रहा था।
जिले के कलेक्टर अभिजीत सिंह ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा फसल प्रदर्शन सही स्थान पर नहीं कराया गया और मौके पर किसान का फोटो भी नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि जिस जगह कार्यक्रम होना था, वहां नहीं कराया गया और वहां अफीम की खेती मौजूद थी, जिसकी सूचना भी नहीं दी गई।
कलेक्टर के अनुसार यह गंभीर लापरवाही है, इसलिए संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच अभी जारी है और यदि अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद कृषि विभाग के दफ्तरों में अचानक “निरीक्षण संस्कृति” जाग गई है। जिन अधिकारियों को अब तक खेतों में जाने का समय नहीं मिल पाता था, वे अब खुद खेतों की ओर रुख करने लगे हैं। गांवों में भी लोग मजाक में कहने लगे हैं कि “अब खेत में फसल के साथ अधिकारी भी उगने लगे हैं।”
कृषि विभाग के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस घटना के बाद विभाग ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करें और किसी भी प्रकार की अवैध खेती या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाएं।
हालांकि गांव के लोग इस निर्देश पर भी हल्का-फुल्का हास्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर निरीक्षण पहले से ही ठीक से होता तो शायद अफीम की खेती को इतनी “सरकारी सुरक्षा” नहीं मिलती।
इधर जिले में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। लोग चाय की दुकानों से लेकर खेतों तक यही चर्चा कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी खेती अधिकारियों की नजर से कैसे बच गई। कुछ लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही बता रहे हैं तो कुछ इसे “कागजी खेती” का नतीजा कह रहे हैं।
बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात तो साफ कर दी है कि खेती सिर्फ खेतों में ही नहीं, फाइलों में भी होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि खेत की फसल दिख जाती है, लेकिन फाइलों की खेती देर से पकड़ में आती है।
फिलहाल दुर्ग जिले में अफीम की खेती पर प्रशासन का हल चल चुका है और कृषि विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस “अफीम प्रकरण” की फसल से और भी नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
गांव वाले भी अब मजाक में कहते नजर आ रहे हैं —
“धान के कटोरे वाले प्रदेश में अब अफीम की फसल भी उगने लगी है, फर्क सिर्फ इतना है कि किसान नहीं, लापरवाही इसे सींच रही थी।”













