“खून और पानी साथ-साथ नहीं बहेंगे” – लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी का ऐलान, सिंधु समझौते पर कड़ा रुख!
New Delhi/स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा बयान दिया, जिसने देश-विदेश में हलचल मचा दी। उनके शब्दों में जो दृढ़ता, जो संकल्प और जो राष्ट्रहित की गूंज थी, वह सीधे करोड़ों भारतीयों के दिलों तक पहुंची।
सुबह-सुबह तिरंगे के रंग में रंगा लाल किला देशभक्ति के गीतों और जयकारों से गूंज रहा था। आसमान में उड़ते तिरंगे के गुब्बारे, बैरिकेड्स पर तैनात सुरक्षाकर्मी और दूर-दूर तक उमड़ी जनसैलाब—सब इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
राजघाट पर महात्मा गांधी को नमन करने के बाद पीएम मोदी लाल किले की ओर बढ़े। ठीक 7:30 बजे उन्होंने 12वीं बार लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराया। इसके साथ ही सेना के बैंड ने राष्ट्रगान की धुन छेड़ी और 21 तोपों की सलामी ने पूरे वातावरण को गर्व और रोमांच से भर दिया।
सिंधु समझौते पर बड़ा हमला!
अपने संबोधन के बीच प्रधानमंत्री का स्वर अचानक और भी तीखा हो गया। उन्होंने जनता की ओर देखते हुए कहा—
• “भारत ने तय किया है कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बहेंगे।”
• पीएम ने दो टूक कहा कि भारतीय नदियों का पानी अब दुश्मनों के खेतों में नहीं जाएगा।
“हिंदुस्तान को उसके हक का पानी मिलेगा। इस पर हमारे किसानों का हक है। सिंधु समझौता एकतरफा और अन्यायपूर्ण था। राष्ट्रहित में यह समझौता अब स्वीकार्य नहीं है,” उन्होंने एलान किया।
यह बयान सिर्फ शब्द नहीं था, बल्कि दशकों पुराने विवाद पर भारत के रुख में एक निर्णायक मोड़ का संकेत था। उनके यह कहते ही मैदान में मौजूद हजारों लोग तालियों और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठे।
ऑपरेशन सिंदूर के जांबाजों को सलाम!
पीएम मोदी ने अपने भाषण का एक अहम हिस्सा सेना को समर्पित किया। गर्व से भरे स्वर में उन्होंने कहा—
• “आज लाल किले की प्राचीर से ऑपरेशन सिंदूर के जांबाजों को सैल्यूट करने का अवसर मिला है। हमारे वीर सैनिकों ने दुश्मनों को उनकी कल्पना से परे सजा दी है।”
• ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम लेते ही माहौल में सन्नाटा पसर गया, फिर अचानक तालियों की गड़गड़ाहट गूंजी। मंच पर पीएम मोदी की आंखों में गर्व की चमक थी, और भीड़ में कई आंखें नम हो गईं।
दृश्य जो दिल में बस गए!
• लाल किले के विशाल प्रांगण में बैठा हर नागरिक, टीवी के सामने बैठा हर परिवार, और मोबाइल स्क्रीन पर लाइव देख रहे करोड़ों लोग—सभी ने इस पल को अपने दिल में दर्ज कर लिया।
• गुब्बारों की उड़ान: भाषण की शुरुआत में आकाश में छोड़े गए तिरंगे के रंग के हजारों गुब्बारे मानो संदेश दे रहे थे कि भारत की आकांक्षाएं अब असीम हैं।
• सैनिकों की परेड: सलामी गार्ड की परेड इतनी सटीक थी कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
प्रधानमंत्री का भावुक पल: जब उन्होंने ‘सिंधु का पानी हिंदुस्तान के खेतों में लौटेगा’ कहा, तो उनके स्वर में दृढ़ता के साथ-साथ किसानों के लिए चिंता भी झलक रही थी।
राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय हलचल!
प्रधानमंत्री का यह बयान न केवल देश के भीतर, बल्कि पड़ोसी मुल्क और वैश्विक मंच पर भी बड़ा संदेश था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंधु समझौते पर यह सबसे बड़ा और सीधा हमला है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय अदालतों और कूटनीतिक बैठकों में गूंजेगा। वहीं, देश के किसान संगठनों ने इस घोषणा का जोरदार स्वागत किया है और इसे ‘ऐतिहासिक फैसला’ बताया है।
जनता की प्रतिक्रिया!
लाल किले के बाहर मौजूद लोगों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह पीएम मोदी के इस बयान की चर्चा थी। ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर #खूनऔरपानी, #OperationSindoor और #IndependenceDay2025 जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
इतिहास के पन्नों में दर्ज यह दिन!
15 अगस्त 2025 का यह भाषण आने वाले समय में एक मील का पत्थर माना जाएगा। जिस तरह 1947 में आजादी का सपना सच हुआ था, उसी तरह आज भारत ने जल नीति पर एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दे दिया है।
लाल किले की प्राचीर से गूंजे पीएम मोदी के ये शब्द—
“भारत ने तय किया है कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बहेंगे”
अब इतिहास की गूंज बनकर हर भारतीय के दिल में लंबे समय तक जीवित रहेंगे।