खंडहर में दफन रहस्य: 13 वर्षीय चिन्मय की लाश ने हिलाया बिलासपुर, गांव में मातम और गुस्से का सैलाब!
Bilaspur/रतनपुर के भरारी गांव के सुनसान पड़े खंडहर स्कूल में गुरुवार की दोपहर फैली तेज दुर्गंध ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। दरअसल, जब गांव के कुछ लोग इस बदबू के स्रोत तक पहुंचे, तो वहां का मंजर इतना भयावह था कि उनके रोंगटे खड़े हो गए—जर्जर दीवारों और टूटी खिड़कियों के बीच, 13 वर्षीय चिन्मय सूर्यवंशी की सड़ी-गली लाश पड़ी थी। यही वो बच्चा था, जो पिछले 15 दिनों से रहस्यमय तरीके से लापता था।
गुमशुदगी से खौफनाक सच तक!
15 दिन पहले, चिन्मय अचानक गायब हो गया था। परिजनों ने तुरंत रतनपुर थाना पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन गांववालों का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में कोई खास गंभीरता नहीं दिखाई। “अगर पहले ही पूरी ताकत से खोजबीन होती, तो शायद मेरा बेटा आज जिंदा होता,”—रोते-रोते यह शब्द कह रही थी चिन्मय की मां, जिसकी आंखों में आंसू और दिल में दर्द का समंदर था।
इस दौरान परिजनों और ग्रामीणों ने अपने स्तर पर दिन-रात खोज की, खेत-खलिहानों, जंगलों और नालों तक में तलाश की, लेकिन चिन्मय का कोई पता नहीं चला। समय बीतता गया, उम्मीदें धुंधली होती गईं—और फिर आई ये भयावह खबर, जिसने पूरे गांव को पथरा दिया।
खंडहर स्कूल बना मौत का गवाह!
भरारी गांव के बाहरी छोर पर स्थित यह पुराना प्राथमिक स्कूल पिछले कई सालों से वीरान पड़ा था। टूटी बेंचें, दीवारों पर उखड़ा प्लास्टर और झाड़ियों से घिरा आंगन—ये जगह गांव के बच्चों के खेलने की नहीं, डराने वाली कहानियों का अड्डा बन चुकी थी।
गुरुवार को जब कुछ ग्रामीणों ने यहां से उठती सड़ी दुर्गंध को महसूस किया, तो वे टॉर्च लेकर अंदर गए। दरवाजा धकेलते ही उन्हें लगा जैसे किसी ने उनकी सांसें थाम ली हों—चिन्मय का शव वहीं पड़ा था, चारों ओर खामोशी, और हवा में मौत की गंध।
गांव में दहशत, पुलिस पर सवाल!
सूचना मिलते ही रतनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। चारों ओर पीली पट्टी खींच दी गई, फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाने शुरू कर दिए।
ग्रामीणों का कहना है—”अगर पुलिस ने शुरुआत से ही पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया होता, तो बच्चा जिंदा मिल सकता था। 15 दिन तक ये शव यहीं पड़ा रहा, और किसी को भनक तक नहीं लगी—ये लापरवाही नहीं तो क्या है?”
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस सुनसान स्कूल में अपराधियों को छुपने और सबूत मिटाने का पूरा मौका मिलता है। “ऐसे खंडहर प्रशासन को या तो ध्वस्त कर देने चाहिए या पुलिस चौकी बना देनी चाहिए,”—एक ग्रामीण ने गुस्से में कहा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी उम्मीदें!
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चिन्मय की मौत का असली कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा। हालांकि हत्या की आशंका को देखते हुए जांच हत्या के एंगल से ही की जा रही है। पुलिस को शक है कि चिन्मय की हत्या कहीं और कर शव को यहां फेंका गया, ताकि कोई सुराग न मिले।
संदिग्ध से पूछताछ में कई अहम बातें सामने आने की उम्मीद है। पुलिस के मुताबिक, “हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं—किसने, क्यों और कब इस मासूम की जान ली। दोषी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”
गांव में मातम और गुस्से का माहौल!
भरारी गांव में अब सिर्फ मातम है। गलियों में सन्नाटा, घरों में सिसकियां, और चौपाल पर बैठकर न्याय की मांग करते लोग। महिलाओं की आंखों में आंसू हैं, पुरुषों के चेहरे पर आक्रोश। गांव के युवाओं ने चेतावनी दी है कि अगर दोषी को जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा नहीं दी गई, तो वे धरना-प्रदर्शन करेंगे।
चिन्मय की मौत ने गांव के हर माता-पिता को हिला दिया है। “आज चिन्मय है, कल हमारा बच्चा हो सकता है… हमें सुरक्षा चाहिए, सिर्फ वादे नहीं”—यह मांग हर घर से उठ रही है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
• आखिर 15 दिनों तक चिन्मय कहां था?
• क्या पुलिस की शुरुआती लापरवाही ने उसकी जान ले ली?
• खंडहर स्कूल को अपराधियों का अड्डा बनने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
ये सवाल सिर्फ भरारी गांव के नहीं, पूरे समाज के सामने खड़े हैं। क्योंकि हर गुमशुदा बच्चा, हर अनसुलझा मामला, हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर एक सवालिया निशान है।
गांव में अब एक ही आवाज गूंज रही है—”चिन्मय को न्याय दो”। और जब तक यह आवाज अपने मुकाम तक नहीं पहुंचेगी, भरारी गांव की खामोशी, हर बीतते दिन के साथ और भारी होती जाएगी।