“किश्तवाड़ में आसमान फटा, धरती कांपी… मचैल माता यात्रा मार्ग पर तबाही का मंजर, मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका”
J&k/जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले का शांत चाशोटी इलाका, जो इन दिनों भक्तिभाव से सराबोर मचैल माता यात्रा की शुरुआती चौकी बना हुआ था, गुरुवार सुबह अचानक दहशत के मंजर में बदल गया। सुबह करीब 11:30 बजे आसमान से बरसी आफत—बादल फटा, और देखते ही देखते पूरे इलाके में फ़्लैश फ़्लड की स्थिति बन गई। उफनते पानी और मलबे ने सड़कें, घर, दुकानों और तीर्थमार्ग को अपने आगोश में ले लिया। प्रशासन ने भारी जन-धन हानि की आशंका जताई है, हालांकि सही आंकड़े अभी तक सामने नहीं आए हैं।
घटना की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि मचैल माता यात्रा का यह मार्ग इस समय हज़ारों श्रद्धालुओं से भरा था। स्थानीय विधायक सुनील कुमार शर्मा ने कहा, “भारी नुक़सान होने की आशंका है, लेकिन अभी कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यात्रा का समय होने के कारण वहां काफी भीड़ थी।”
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का शोक संदेश:राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक्स पर लिखा,
“किश्तवाड़ में बादल फटने से कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुःखद है। शोकाकुल परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना और राहत-बचाव कार्य की सफलता की कामना करती हूं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना जताते हुए कहा!
“हम हालात पर क़रीब से नज़र रख रहे हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है। ज़रूरतमंदों को हर संभव सहायता दी जाएगी।”
बचाव कार्य में बाधा!
जम्मू डिवीज़नल कमिश्नर रमेश कुमार के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस, मेडिकल टीम और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए गए हैं, परंतु मौसम और सड़क की स्थिति बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया, “सड़कें बह चुकी हैं, हेलीकॉप्टर उड़ाना संभव नहीं है। केंद्र से लगातार समन्वय कर रहे हैं, लेकिन खराब मौसम बड़ी चुनौती है।”
गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि केंद्र और राज्य प्रशासन के बीच तालमेल से राहत कार्य चल रहा है और हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
पहाड़ों पर बरसी आफ़त!
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, बादल फटते ही आसपास के नाले-झरनों का जलस्तर अचानक कई गुना बढ़ गया। तेज़ बहाव अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर, मलबा और पेड़ बहाकर लाया। चाशोटी से मचैल माता मंदिर तक जाने वाले रास्ते के कई हिस्से टूट गए हैं।
पुंछ जिले के मेंधार इलाके में भी भारी बारिश के चलते नदी उफान पर है, और कई जगहों पर सड़कों पर पानी भर गया है। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
नेताओं की प्रतिक्रिया!
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा, “ख़बर गंभीर है। प्रभावित इलाकों में हर संभव संसाधन भेजे जा रहे हैं। फिलहाल मीडिया को कोई गैर-पुष्ट जानकारी न देने का आग्रह है।”
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक़ अब्दुल्लाह ने बादल फटने को जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हुए कहा, “ग्लोबल वार्मिंग के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में यह घटनाएं आम होती जा रही हैं। प्रधानमंत्री से अपील है कि इसके समाधान पर गंभीरता से विचार किया जाए।”
उन्होंने याद दिलाया कि उत्तराखंड, रामबन और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में भी पिछले वर्षों में ऐसी आपदाएं देखी गईं, जिनमें भारी जनहानि और संपत्ति का नुकसान हुआ।
श्रद्धालुओं में अफ़रा-तफ़री!
मौके से मिल रही शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यात्रा मार्ग पर कई जगह लोग फंसे हुए हैं। कुछ ने मंदिर परिसर या ऊंचाई वाले इलाकों में शरण ली है। स्थानीय स्वयंसेवक और सुरक्षाबल मिलकर फंसे हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, “पहले तेज़ बारिश हुई, फिर अचानक कानफोड़ू गर्जना के साथ पानी और मलबे की दीवार नीचे उतरी। जो जहां था, वहीं से भागने लगा। कई लोग अपने परिजनों से बिछड़ गए हैं।”
प्रशासन की तैयारी!
घटना के बाद किश्तवाड़ में इमरजेंसी कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया गया है। मेडिकल टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नजदीकी अस्पतालों में अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की जा रही है। सेना, बीएसएफ और एनडीआरएफ को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है।
हालांकि, पहाड़ी भूगोल और मौसम बचावकर्मियों के लिए चुनौती बना हुआ है। लगातार बारिश के चलते भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है, जिससे कई रास्ते बंद हो चुके हैं।
उम्मीद और प्रार्थना!
पूरे देश की निगाहें अब किश्तवाड़ पर टिकी हैं। लोग सोशल मीडिया पर पीड़ितों के लिए दुआ कर रहे हैं और मदद पहुंचाने की अपील कर रहे हैं। यह त्रासदी न केवल स्थानीय बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि प्रकृति के कोप और जलवायु परिवर्तन को नज़रअंदाज़ करना कितना खतरनाक हो सकता है।
फिलहाल, राहत और बचाव टीमें दिन-रात जुटी हैं। उम्मीद है कि जल्द ही सभी फंसे लोग सुरक्षित निकाले जाएंगे और नुक़सान का सटीक आकलन सामने आएगा। परंतु इस समय, मचैल माता के आशीर्वाद के साथ पूरी घाटी यही प्रार्थना कर रही है कि मौत का आंकड़ा और न बढ़े।