अभपुर के बेलभाठा की सरकारी जमीन पर ‘रिसोर्ट राज’ का खेल:20 एकड़ पर भू-माफियाओं का कब्जा, प्रशासन ने बैठाई जांच!
“तालाब किनारे सरकारी जमीन पर अवैध प्लॉटिंग का आरोप, एक सप्ताह में रिपोर्ट देने राजस्व टीम को आदेश”
अभनपुर/रायपुर।छत्तीसगढ़ की शांत धरती पर एक बार फिर जमीन का ऐसा खेल सामने आया है जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर गांव की चौपाल तक हलचल मचा दी है। रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र के ग्राम बेलभाठा में सरकारी जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर प्लॉटिंग और रिसोर्ट निर्माण का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इस पूरे प्रकरण ने भू-माफियाओं के हौसलों और सरकारी जमीन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की शुरुआत तब हुई जब ग्राम अभनपुर निवासी भूषण साहू ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय में एक विस्तृत आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में आरोप लगाया गया कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने ग्राम बेलभाठा की सरकारी भूमि पर कब्जा कर अवैध तरीके से रास्ता बना लिया और बड़े तालाब/बांध के किनारे स्थित जमीन को प्लॉटिंग कर बेचने की तैयारी कर रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि बिना किसी टी.एन.सी. (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) की स्वीकृति के यहां रिसोर्ट निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि जिस जमीन को लेकर विवाद खड़ा हुआ है उसका कुल रकबा लगभग 86.25 एकड़ है, जिसमें से करीब 20 एकड़ शासकीय भूमि होने का दावा किया गया है। आरोप है कि इस सरकारी जमीन को ही निशाना बनाकर भू-माफियाओं ने पहले रास्ता बनाया, फिर वहां प्लॉटिंग की रूपरेखा तैयार की और अब रिसोर्ट का निर्माण भी शुरू कर दिया है।
शिकायत में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं उनमें तरुण कुमार श्रीवास, श्रीमती झरना पाल, विद्याधर, गोविंद सोलंकी, अजय राठी, श्रीमती नीतु शुक्ला और श्रीमती मोनु शर्मा शामिल बताए गए हैं। आरोप है कि इन सभी ने मिलकर सरकारी जमीन को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करते हुए उसे बेचने की योजना बना डाली।
जैसे ही यह शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अभनपुर के पास पहुंची, प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए 12 मार्च 2026 को एक औपचारिक आदेश जारी किया गया। आदेश में राजस्व विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाकर पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस जांच दल में राजस्व निरीक्षक केशव राम ध्रुव (पिपरौद), राजस्व निरीक्षक कविता साहू (तोरला), हल्का पटवारी नवीन कुमार सिन्हा (बेलभाठा), विजय गजभिये (खिलोरा) और यवनीश गजेन्द्र (खोला) को शामिल किया गया है। टीम को निर्देश दिया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर ग्राम बेलभाठा पहुंचकर जमीन का संयुक्त निरीक्षण करें, सीमांकन करें और पूरे मामले का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
इस आदेश के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से तालाब किनारे बड़े पैमाने पर गतिविधियां बढ़ गई थीं। ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें अक्सर वहां देखी जाती थीं और जमीन समतल करने का काम तेजी से चल रहा था। कई ग्रामीणों को तब शक हुआ था कि यहां कोई बड़ा निर्माण होने वाला है।
ग्रामीणों का दावा है कि कुछ लोगों ने जमीन के छोटे-छोटे प्लॉट दिखाकर खरीददार भी तलाशने शुरू कर दिए थे। बाहरी लोगों को यह बताया जा रहा था कि यह जल्द ही एक शानदार रिसोर्ट और फार्महाउस कॉलोनी बनने वाली है, जहां शहर के लोग सुकून के लिए जमीन खरीद सकेंगे।
हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक किसी भी निर्माण को वैध नहीं माना गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर प्लॉटिंग या निर्माण किया गया है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें अतिक्रमण हटाने से लेकर संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी जमीनें इतनी आसानी से भू-माफियाओं के निशाने पर कैसे आ जाती हैं। अक्सर देखा गया है कि पहले रास्ता बनाया जाता है, फिर धीरे-धीरे जमीन समतल कर दी जाती है और उसके बाद उसे निजी कॉलोनी या रिसोर्ट के रूप में विकसित करने की कोशिश शुरू हो जाती है।
बेलभाठा का मामला भी कुछ ऐसा ही प्रतीत हो रहा है, जहां प्राकृतिक सौंदर्य और बड़े तालाब के किनारे की जमीन को आकर्षक बनाकर उसे व्यावसायिक रूप देने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन अब जब शिकायत सामने आ गई है और जांच के आदेश जारी हो गए हैं, तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्रामीणों की निगाहें अब जांच टीम की रिपोर्ट पर टिक गई हैं। गांव की चौपाल से लेकर बाजार तक यही चर्चा है कि क्या सचमुच सरकारी जमीन पर कब्जा कर रिसोर्ट का सपना बुना जा रहा था, या फिर यह सिर्फ आरोपों का जाल है।
एक सप्ताह बाद आने वाली जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि बेलभाठा की शांत जमीन पर उग रहा यह “रिसोर्ट राज” सच है या फिर जमीन के खेल की कोई नई कहानी। फिलहाल प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।












